Friday, 22 August 2014




 जिंदगी....


ठहर जाती है कभी, कभी झट से फिसल जाती है,
वक़्त के कांच पर ओस की बूँद जैसी है जिंदगी |

गम में उलझ जाये तो रोये सी फड़फड़ाती है,
बयार खुशियों की चले, तो लहलहाती है जिंदगी |

कभी सब कुछ पाकर भी अधूरेपन से छटपटाती है,
कभी सब कुछ लुटाकर भी मुस्कुराती है जिंदगी |

कभी उमंगों की रेत से आँखों के किनारे महल बनाती है,
पर सच्चाइयों की लहरों को रोक नहीं पाती है जिंदगी |

दिल साँसों की धमकियाँ सहता रहे, तब भी गुज़र जाती है,
पछताना पड़े चाहे, नाजायज़ सपने से रिश्ते बनाती है जिंदगी |


ग़मों से लड़ते लड़ते कितनी ही बार चूर चूर हो जाती है,
फिर भी चुटकी भर खुशियों की राह निहारती है जिंदगी |

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